August 10, 2022

एक हफ्ते की बारिश में बांधों के पानी में मात्र 5 फीसदी इजाफा

बांदा। जिले में एक हफ्ते से हो रही मानसूनी बारिश से चित्रकूटधाम मंडल के खेत लबालब तो भर गए, लेकिन यहां के सभी 13 बांधों में पानी नहीं है। बांधों में बमुश्किल पांच फीसदी पानी का ही इजाफा हुआ है। मंडल की तीनों मुख्य नदियों के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई है। मानसूनी मौसम को डेढ़ माह बीत गया। अब अगस्त माह में संभावित वर्षा से बांधों और नदियों में उफान और बाढ़ की उम्मीद की जा रही है। भले ही अब बारिश लगातार हो रही है, लेकिन मंडल में खेती किसानी का काम पिछड़ गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि खरीफ की फसल का समय निकल चुका है। किसानो का कहना है कि अगर दो दिन अगर बारिश नही होती तो सूखा घोषित हो जाता।
केन नदी किनारे छोटे-छोटे मजरे छनिहा डेरा, सिमरा डेरा, शिवपाल डेरा, भरथा डेरा, मुरलिया डेरा सहित कुटी डेरा, बरेहटा के लोगों की जीविका नदी से जुड़ी है। यहां सबसे पहले सिमरा डेरा में बाढ़ का पानी घुसता है। लेकिन अलर्ट के बाद भी यह लोग जीविका के चलते अपना घर-बार नहीं छोड़ते। प्रतिदिन नाव से राशन सामग्री और सब्जी इत्यादि लाते हैं।लेखपाल कृष्णचंद्र ने बताया कि केन नदी खतरे के निशान से बहुत नीचे है।
चुनबाद सिंह, इंद्रपाल शुक्ला, शिवशंकर तिवारी ने बताया कि केन नदी का पानी पंचायत घर के नीचे नहीं रहने तक बाढ़ का ज्यादा खतरा नहीं होता। सबसे पहले सेमरा डेरा में बाढ़ का पानी घुसता है। प्रतिदिन यहां से लोग नाव से भूसा चारा भरकर लाते हैं। क्योंकि कस्बे के एक तिहाई किसानों की जमीन केन नदी के उस पार है। जिनका प्रतिदिन नाव से आवागमन होता है। नाव के माध्यम से ही राशन सामग्री सब्जी आदि लाना ले जाना प्रतिदिन का काम है।