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कबीर महान लेखक और कवि थे

दस अंगुलियां ब्यूरो

वाराणसी। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने भक्ति संप्रदाय के महान संत कबीर दास की जयंती पर कहा कबीर साहब की विचारधारा आज भी प्रासांगिक हैं। कबीर ने मध्यकाल में जो बाते कही हैं वह 21वीं सदी में भी ऐसी लगती हैं जैसे उन्होंनें आज के बारे में ही लिखी हों। कबीर जीव हत्या के विरोधी तथा मानवता के सच्चे पक्षधर थे। कबीर धर्म के विरोध में नहीं बल्कि धर्म के नाम पर होने वाले पाखंड के विरोध में खड़े हैं। वे जात-पात का विरोध करते हैं क्योंकि उनके सामने जात-पात के कारण होने वाले अन्याय के अनेक उदाहरण थे। कबीर महान लेखक और कवि थे।

उन्होंने मानवता का संदेश देते हुए आडंबर के खिलाफ समाज सुधार तथा सांप्रदायिक एकता पर बहुत जोर देते थे। कबीर ने कहा जहां दया तहां धर्म है। जहां लोभ वहां पाप। जहां क्रोध तहा काल है ,जहां क्षमा वहां आप। उन्होंने कहा मोह, काम, क्रोध, अहंकार आदि वह दुर्गुण है जो मनुष्य को धर्म और इंसानियत से दूर ले जाते हैं। जिस समय देश में धार्मिक कर्मकांड और पाखंड का बोलबाला था। ऐसे समय में क्रांतिकारी संत समाज सुधारक ने हिंदू और मुस्लिम दोनों के पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई तथा लोगों में भक्ति भाव ,भाईचारा एवं समभाव का बीज बोया कबीर ने भक्ति की अलख देश के विभिन्न हिस्सों में घूमकर जगाया है। कबीर आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते जो सीधे लोगों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ती थी। जिस काशी को मोक्षदायिनी कहा जाता है और जहां लोग अंतिम समय में मुक्ति के लिए अपने प्राण त्यागना पसंद करते हैं इस अंधविश्वास को तोड़ने के लिए कबीर ने जीवन के अंतिम समय में मगहर नामक स्थान पर चले गये वहीं सन् 1518 में उनका देहावसान हुआ। कबीरदास जी का वैचारिक व्यक्तित्व हर काल में सदैव प्रासंगिक और अमर रहेगा ।

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