उन्नाव

महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत, की बरगद की पूजा

मगरवारा। ग्रामीण क्षेत्रों मे वट सावित्री व्रत यानि बरगदाही का पर्व काफी उत्साह के साथ मनाया गया। मगरवारा व आसपास के गांवों में सोमवार को वट सावित्री व्रत यानि बरगदाही का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिनों ने बिना जल ग्रहण किये अपने पति की लम्बी आयु की प्रार्थना के लिए साजो श्रंगार कर, बरगद के वृक्ष के तले पूजा अर्चना की। पेड़ की परिक्रमा कर चारों ओर से कच्चे धागे से लपेटा। इसके साथ ही खरबूजा, चना व चावल को पीस कर बनायी गयी विशेष पूजन सामग्री से वृक्ष की पूजा कर, अपने पति की लम्बी आयु के लिए दुआ मांगी। ऐसी मान्यता है कि जब सत्यवान के प्राण हर कर यमराज वापस जाने लगे तो पतिव्रता सावित्री भी उनके पीछे चल पड़ी। काफी दूर जाकर जब यमराज ने देखा कि सावित्री तो साथ ही चली आ रहीं हैं। तो उन्होंने समझाया लेकिन सावित्री नही मानी । फिर यमराज ने वरदान मांगने को कहा सावित्री ने बड़ी ही विनम्रता से कहा कि अगर आप हमें वरदान देना ही चाहते हैं तो मुझे ये वरदान दें कि मैं पुत्रवती हों। यमराज ने तथास्तु कह दिया। लेकिन इसका अर्थ बाद में समझा। वह बोले हे सावित्री मंै तुमसे प्रसन्न हुआ। जाओ मंै तुम्हारे पति के प्राण वापस लौटाता हूं। इस तरह से पतिव्रता सावित्री ने मौत से भी लड़कर अपने पति के प्राणों को वापस करा लिया। तभी से वट सावित्री व्रत मनाया जाने लगा।

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