उन्नाव

शिवपुराण में वीरभद्र की कथा सुन श्रोता हुए स्तब्ध

उन्नाव। गोकुल बाबा परिसर में चल रही शिव महा पुराण कथा के पांचवे दिन प्रशांत प्रभुदास महाराज ने आगे की कथा सुनाते हुए बताया कि शिव जी सतीजी के साथ दंडकारण वन में भ्रमण करते समय सीता जी को खोजते हुए राम जी को देख कर नमन करते हैं। सती शंका करती हैं कि महादेव सबसे बड़े देव फिर नमन किसको कर रहे।भोलेनाथ कहते हैं हर और हरि में कोई भेद नही, दोनों एक दूसरे को नमन करते हैं। अपने से श्रेष्ठ अगर कुछ कहे तो उसे आंख बंद कर के मानना चाहिए। सती ने अवहेलना करते हुए राम की परीक्षा लेने सीता के रूप में उनके सामने पहुंचती हैं। राम ने उन्हें देखते ही माँ कह कर पुकारा। सती को क्षोभ हुआ कि कैसे पहचान गए। राम ने कहा माते रक्त कल्प में आप से ही रज लेकर शिव जी ने मुझ नारायण की उत्पत्ति की थी। क्योंकि मैं उनका आत्मज हूँ और वो मेरे पिता तभी हम एक दूसरे को नमन करते हैं। राम की परीक्षा लेने के कारण शिव जी, सती का मानसिक रूप से त्याग कर देते हैं। कुछ समय बाद दक्ष भगवान शिव को नीचा दिखाने के लिए यज्ञ करते हैं और शिव जी को नहीं आमंत्रित करते हैं। देवर्षि नारद सती के पास यज्ञ कीसूचना लेकर आते हैं और उन्हें भी शामिल होने की सलाह देते हैं। शिव जी के मना करने पर भी वो जाती हैं और यज्ञ में शिव जी का भाग न देख कर कुपित होकर क्रोध में खुद को योगाग्नि से भष्म कर लेती हैं। यज्ञ में हाहाकार मच जाता है। शिव अपनी जटाओं से वीरभद्र की उत्पत्ति करके उसे आदेश देते हैं कि यज्ञ में जितने राजा, ब्राह्मण और दक्ष सभी को कठोर दंड दो। वीर भद्रे महारुद्रे कृपाण लेकर चल पड़े संघार करते। प्रशांत प्रभदास जी ने इस प्रकार युद्ध का चित्रण किया मानों पांडाल में वीरभद्र स्वयं आ गए हों। ओजपूर्ण कथा सुन श्रोताओं का रोम रोम खड़ा हो गया। आचार्य विवेक शर्मा, सूत्रधार राहुल पांडेय और मीडिया प्रमुख ने बताया कि अगले दिन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को आधार मानते हुए पार्वती के जन्म की कथा होगी और गुलगुले का प्रसाद वितरित किया जाएगा। मुख्य यजमान राजेश त्रिपाठी, उर्मिला सिंह, राजा सिंह सेंगर, सत्यवती सिंह, धीरज सिंह, राम विलास अवस्थी, विक्रम सिंह आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजन अर्चन में भाग लिया।

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