वाराणसी

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण का रास्ता हुआ साफ

वाराणसी। विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण कार्य को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। अदालत ने कॉरिडोर के निर्माण कार्यों के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं पर पांच-पांच हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। यह जुर्माना राशि याचिकाकर्ताओं को आज की डेट से एक महीने के अंदर मंदिर ट्रस्ट में ही जमा करवानी होगी।
इस सम्बन्ध में बात करते हुए विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के हाईकोर्ट में स्पेशल काउन्सिल विनीत संकल्प ने बताया कि प्रदीप श्रीवास्तव व दो अन्य लोगों ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य के खिलाफ अवमानना अर्जी दाखिल की थी, जिसमें प्रदीप ने 2005 में कौटिल्य सोसाइटी के नाम से दायर हुई जनहित याचिक पर आये 2008 के फैसले कि गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में किसी तरह के निर्माण पर रोक के बावजूद विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण कार्य होना हाईकोर्ट के पुराने आदेश की अवमानना बताया था। स्पेशल काउन्सिल विनीत संकल्प ने बताया कि इस अर्जी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्यों पर रोक लगाए जाने का आदेश दिए जाने की मांग की गई थी।
जस्टिस एसपी केसरवानी की बेंच में हुई इस मामले की सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि जनहित को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी व अन्य विभागों ने निर्माण कार्य की अनुमति दी है। इस निर्माण कार्य से गंगा नदी में कोई प्रदूषण नहीं होगा और सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके ही निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। अदालत ने इस मामले में यह माना कि अवमानना याचिका में इन तमाम तथ्यों को छिपाया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद कॉरिडोर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस मुकदमे में शासन की तरफ से अपर महाधिवक्ता महेश चंद्र चतुर्वेदी ने भी शासन का पक्ष रखा।

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