वाराणसी

भारतीय फौज के शौर्य का प्रतीक,कारगिल विजय दिवस-अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी। भारतीय फौज के शौर्य का प्रतीक कारगिल विजय के 21वें स्मृति दिवस पर ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कारगिल शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में जिन भारतीय सैनिकों ने देश की रक्षा में पाकिस्तानी सेना को धूल चटाते हुए, अपने प्राणों की आहुति दे दी। इतिहास में वह सदैव जीवित रहेंगे।
उन्होंने कहा जम्मू-कश्मीर के कारगिल सेक्टर में एलओसी के पास 1999 में मई से जुलाई के दौरान पाकिस्तान से हुए युद्ध की द्वितीय विश्व युद्ध से तुलना की जाती है। क्योंकि कारगिल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद महीनों चलने वाला इतिहास का सबसे भयानक युद्ध माना जाता है इस युद्ध में भारी मात्रा में विस्फोटक राकेट और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया था। जिसमें 500 से अधिक सैनिक शहीद तथा हजारों घायल हुए थे।
इस अवसर पर कारगिल शहीदों को नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले लोगों में प्रमुख रूप से श्रीकांत विश्वकर्मा, डॉ प्रमोद कुमार विश्वकर्मा, नंदलाल विश्वकर्मा, सुरेश कुमार विश्वकर्मा एडवोकेट, रमेश विश्वकर्मा, भैरव विश्वकर्मा, लोचन विश्वकर्मा, दीनदयाल विश्वकर्मा, कालिका विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, अजय विश्वकर्मा, धीरेंद्र उर्फ मिंटू विश्वकर्मा आदि लोग थे।

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