वाराणसी

ब्यूरोराष्ट्रीय गंगा उत्सव में दिखेगा सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लास

वाराणसी। भारत की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहर का उल्लास मनाता नमामि गंगे का वार्षिक कार्यक्रम ‘गंगा उत्सव 2020’ वर्चुअल तरीके 2 से 4 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है । कोरोना संकट के चलते इस बार यह गंगा उत्सव वर्चुअल तरीके से किया जा रहा है, जिसमें गंगा से जुड़े मुख्य रोचक कार्यक्रमों के अलावा गंगा फिल्म फेस्टिवल, गंगा डायलॉग, मिनी गंगा क्विज, कहानी जंक्शन एवं कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नमामि गंगे (गंगा विचार मंच ) काशी प्रांत के संयोजक राजेश शुक्ला ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में किया जा रहा है। कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा करेंगे ‌। इस बार कार्यक्रम में मुख्य रूप से सद्गुरु जग्गी वासुदेव, गायक कैलाश खेर, अभिनेता राजीव खंडेलवाल, पद्मभूषण अनिल जोशी, नीलेश मिश्र, आनंद नीलकांतन, वस्वती मिश्रा, राजीव महरोत्रा, त्रिचुर बदर्स और कबीर कैफे से जुड़ी मशहूर हस्तियां शामिल होंगी।
वाराणसी में निरंतर मां गंगा की सेवा कर रहे राजेश शुक्ला ने बताया कि गंगा उत्सव कार्यक्रम बहुत ही प्रेरणादायक है। इस तरह के आयोजनों ने गंगा के लिए लोगों का ध्यान आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह गंगा नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है। नमामि गंगे इस कार्यक्रम के माध्यम से गंगा की ‘अविरलता और निर्मलता’ की दिशा में ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ-साथ युवाओं और छात्रों को जोड़ना चाहते हैं, ताकि आने वाले दिनों में एक अनूठा उदाहरण भी पेश किया जा सके। ‘गंगा उत्सव’ के माध्यम से हम देश की अन्य नदियों को भी प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने में योगदान दे सकेंगे। उन्होने बताया कि‘गंगा उत्सव’ गंगा की ‘अविरल और निर्मल’ को बनाए जाने का एक महाअभियान होने के साथ ही, नई उम्मीदों को अवतरित करते हुए एक पावन संस्कृति को जीवंत करने का उपक्रम है। भारत की शाश्वत पहचान जीवंत गंगा से, इसकी पावनता, इसके महत्व, इसकी धारा से हम सभी जुड़े हुए हैं। इस वर्ष घर पर सुरक्षित रहते हुए, इस जुड़ाव को, इस सामीप्य को गंगा उत्सव के माध्यम से कुछ और नजदीक लाएँ। गंगा उत्सवश् गंगा पर आधारित एक तीन दिवसीय कार्यक्रम है।
सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नमामि गंगे हर वर्ष 4 नवंबर को गंगा के राष्ट्रीय नदी घोषित करने के दिवस के रूप में मनाता रहा है। यह उत्सव कथाओं, लोककथाओं, प्रख्यात व्यक्तित्वों के साथ संवादों, क्विज, प्रसिद्ध कलाकारों, नृत्य दीर्घाओं, संगीत व पारंपरिक कलाकृति-प्रदर्शन द्वारा आध्यात्मिक व सांस्कृतिक नदी गंगा का जश्न मनाता रहा है। इस वर्ष यह उत्सव गंगा किनारे रची-बसी सांस्कृतिक समृद्धि का भी उल्लास मनाएगा!

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