प्रयागराज

अमर शहीद बिरसा मुंडा की 145वीं जयंती मनाई गई

कोरांव प्रयागराज। कोरांव नगर पंचायत में आदिवासी समुदाय में जन्मे भगवान बिरसा मुंडा की जयंती कोल बिरादरी ने मनाई।
बताया कि बिरसा मुंडा बहुत ही जननायक एवं संघर्षशील व्यक्ति थे। जिन्होंने जमींदारों से लड़कर अपने आदिवासी समाज को जगाने का काम किया। आज इसलिए वे याद किये जाते हैं। यह एक महान पुरुष एक महान हस्तियां हैं। कन्हैयालाल ने कहा कि हमारे आदिवासी संस्कृति रहन-सहन, आचार विचार लुप्त होता जा रहा है। हम आदिवासी कोल समाज देश में अपनी पहचान नहीं बना सकते हैं। स्पष्ट भी किया भगवान बिरसा मुंडा ने जमींदारों एवं विदेशी शासकों के जुल्म से अपने देशवासियों एवं आदिवासियों को बचाने की निष्काम एवं निरोधक ता पूर्वक लड़ाई लड़ी।
आदिम समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज कोल ने कहा कि वर्तमान की सरकार हो या पूर्व की सरकार हो दोनों सरकारों ने हमें जनजाति का दर्जा नहीं दिया। जनजाति दर्जा प्राप्त हो तो जो सरकारी नौकरी आती है। सीट खाली चली जाती है। सिर्फ खाली न जाए पढ़ा-लिखा वर्ग आदिवासी हकीकत में आदिवासियों की तरह ही जाते हैं । राजेश कहा कि राष्ट्र एवं विश्व की सच्चाई से भी हम भारतीयों को अवगत होना चाहिए तभी हम सच्चे मानव का जीवन प्राप्त कर सकेंगे।
शबरी माता के सनातन कहे जाने वाले को आदिवासियों अपने इतिहास शक्ति एवं सांस्कृतिक धरोहर को पहचानो । असहाय बेबस लाचार क्यों हो अपने आप को मजबूत बनाओ और बच्चों का भविष्य उज्जवल करो पढ़ाओ लिखाओ। आप अपनी शक्ति को पहचानो तथा भगवान बिरसा मुंडा की शहादत याद करो। जिन्होंने अंग्रेज शासकों द्वारा यहां के आदिवासियों एवं जनता के ऊपर चलाए जा रहे हंटर से बचाया।
डॉ राजेश ने बताया कि सरना धर्म आदिवासियों का धर्म है। गर्व से कहो हम आदिवासी हैं लेकिन आदिवासी हिंदू नहीं है मूल निवासी हंै। सूर्य आदिवासी बोले कि बनवासी आदिवासी अपने धर्म तथा संस्कृति की अस्तित्व की रक्षा करें जीवन शक्ति एवं चरित्र का पाठ पढ़ाया बिरसा मुंडा का अंत तक अपने संकल्प के लिए लड़ते रहे।
3 फरवरी 1900 को गिरफ्तार कर लिए गए। जेल में उन्हें यातनाएं दी गई। अंतिम जून 1900 जेल में वीरगती को प्राप्त हुए। धरतीपुत्र के नाम से जाने जाते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य रूप से जयनारायण कोल, श्यामलाल कोल, राघवेन्द्र कोल, डॉ राजेश, कन्हैया लाल, महेंद्र कुमार, राजकुमार हंसराज कोल, फूलचंद्र, विष्णु आदिवासी, शुभम, उर्मिला, पूनम, श्यामलाल, जय नारायण, सूर्यमणि, जीत बहादुर, बादल, अरमान, रोशन आदि लोग उपस्थित रहे हैं।

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