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राज्यपाल ने किया ‘प्रोजेक्ट ब्लू मुम्बई शार्ट फिल्म का उद्घाटन

ऋषिकेश (उत्तराखण्ड)। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, को राजभवन मुंबई में आयोजित ‘प्रोजेक्ट ब्लू-क्लीन, सेफ ब्यूटीफुल मुंबई सी’ लाइव फोरम के प्रमुख वक्ता के रूप में आमंत्रित किया। यह विवेकानंद यूथ कनेक्ट फाउंडेशन की उत्कृष्ट पहल है। आज की लाइव फोरम में राज्यपाल महाराष्ट्र, भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री महाराष्ट्र, देवेन्द्र फर्नांडीज, आचार्य लोकेश मुनि जी, स्वामी विद्यानाथनन्द जी, श्री रामकृष्ण मिशन बेलूर मठ, परिवहन मंत्री अनिल परब और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग कर अपने विचार व्यक्त किये।  राज्यपाल महाराष्ट्र, भगत सिंह कोश्यारी, ने प्रोजेक्ट ब्लू मुम्बई शार्ट फिल्म लांच की। विवेकानंद यूथ कनेक्ट फाउंडेशन के संस्थापक डॉ राजेश सर्वज्ञ और तन्मय चक्रवर्ती ने सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत और अभिनन्दन कियाा। 

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमारे समुद्र, हमारी ब्लू इकॉनमी, हमारे राष्ट्र की नीली अर्थव्यवस्था है तथा अक्षय ऊर्जा का स्रोत भी है। ब्लू इकॉनमी भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 4.1 प्रतिशत योगदान देती है। हमारे समुद्र अकूत संपदा के भंडार हैं जिनका महत्व आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही है। समुद्र मंथन के समय समुद्र से कामधेनु गौ, उच्चैश्रवा नामक सफेद घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभमणि नामक हीरा, कल्पवृक्ष, देवी लक्ष्मी, देवों के चिकित्सक धनवंतरि, अमृत कलश और भी बहुत कुछ निकला था। आज भी बहुत कुछ है समुद्र के गर्भ में और सबसे अधिक महत्वपूर्ण तो समुद्री जीवन हैं। स्वामी जी कहा कि पृथ्वी पर आक्सीजन अपार मात्रा में है परन्तु अभी कोरोना काल में चारों ओर आक्सीजन के लिये हाहाकार मचा हुआ है। कोरोना वायरस से पीड़ित होने के कारण स्वस्थ दिखने वाले लोगों के फेफड़े भी ठीक तरह से काम नहीं कर रहे थे। हम मनुष्यों के पास सुविधायें है, हास्पिटल है, लाइफसेविंग सिस्टम है इसलिये हम स्थितियों पर कंट्रोल कर पाये हैं परन्तु ऐसी स्थिति समुद्र में हो तब क्या होगा? समुद्र में घटता आॅक्सीजन का स्तर चिंता और चिंतन दोनों का विषय है। जलीय जीवन और वन्य जीवन दोनों की बात करें तो वहां कोई ऐसी सुविधायें नही है बस शुद्ध प्राकृतिक जीवन है उनका।  

वर्तमान मेें हमारे सागर, हमारे समुद्र चाहे वह मुम्बई का हो, गोवा का हो या उडीघ्सा का हो सब प्लास्टिक से भर रहे हैं। इनमें इसी तरह से प्लास्टिक जाता रहा तो वह जलीय जीवों के आहार में जायेगा और जल प्रदूषण भी बढ़ेगा जिसके परिणाम स्वरूप महासागरों में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, कई जीवों के जीवन और आस्तित्व का खतरा हो सकता हैैै इसलिये हमें समुद्रों में हो रही ऑक्सीजन की कमी को लेकर बेहद संवेदनशील रहना होगा। समुद्र में शार्क जैसे बड़े शरीर वाले जीवों को अधिक उर्जा की जरूरत होती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण उनका जीवन संकट में आ सकता हैं। इसलिये अब हम सभी को मिलकर ब्लू लाइफ ग्रोथ इनिशिएटिव और ग्रीन लाइफ ग्रोथ इनिशिएटिव पर विशेष ध्यान देना होगा। जलीय जीवन बचाने के लिये अपनी जीवनचर्या और दिनचर्या से प्लास्टिक को पूर्ण रूप से हटाना ही एक समाधान है। स्वामी जी ने कहा कि ब्लू लाइफ रूपी अमूल्य संपदा को बचाने के लिये हमारे जीवन से सिंगल यूज प्लास्टिक को निकालना होगा क्योंकि मामला केवल भारत की जीडीपी में ब्लू इकॉनमी के योगदान का ही नहीं है बल्कि समुद्री जैव विविधता के संरक्षण का भी है। ब्लू इकॉनमी से संबंधित हमारी नीति और हमारे मसौदे देश के आर्थिक विकास और कल्याण हेतु तो हो परन्तु जलीय जीवन दांव पर लगाकर नहीं। हमारे समुद्र हमारा भविष्य हैं। कभी उसमें डालफिन तैरती थी और अब प्लास्टिक कचरे और प्लास्टिक के टुकड़े तैर रहे हैं। आकंडों के अनुसार अरबों टन प्लास्टिक का कचरा हर साल महासागर में समा जाता है आईये मिलकर संकल्प करें, एक इनिशिएटिव लें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करें।

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