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परमार्थ निकेतन द्वारा अयोध्या के आस-पास के क्षेत्रों में वितरित किये स्वच्छता किट

ऋषिकेश। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के आशीर्वाद से परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश द्वारा आध्यात्मिक नगरी अयोध्या के आसपास की बस्तियों तिहुरा मांझा, बनवारी का पुरवा, मद्रहिया, धर्मपुरवा, चक्रसेनपुर, धर्मपुरवा, चक्रसेन में स्वच्छता किट एवं मास्क, हैंड सैनेटाइजर, आदि वितरित किये गये। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि चारों ओर महामारी का व्यापक प्रभाव है जिसके कारण समाज का एक बड़ा हिस्सा बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है ऐसे में सबसे पहली जरूरत भोजन है। कई लोगों को दो वक्त का भोजन जुटाना इस समय मुश्किल हो रहा है, ऐसे में अभावग्रस्त परिवारों को अपने लिये भोजन के साथ स्वच्छता सुविधायें जुटाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। परमार्थ निकेतन का प्रयास रहता है कि स्वच्छता, स्वच्छ जल और सात्विक भोजन तक सभी की पहुंच हो सके।

स्वामी जी ने कहा कि कोविड – 19 महामारी, भारत समेत दुनिया भर में स्वास्थ्य और जीवन के लिये गंभीर चुनौती के रूप में आयी है। भारत में जनसंख्या घनत्व, गरीबी और कई स्थानों पर शिक्षा के अभाव के कारण अपर्याप्त स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधायें इस स्थिति को और अत्यधिक संवेदनशील बनाती है इसलिये भारत को इन स्थितियों से बाहर निकालने के लिये एक सामूहिक प्रयास की जरूरत है। स्वामी जी ने कहा कि कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिये हाथों की स्वच्छता, हाथों को नियमित रूप से साफ रखना और मास्क लगाना एक प्रभावी तरीका माना गया है। भारत में एक बड़ी आबादी है, जिनकी पहुंच स्वच्छ पेयजल तक नहीं है। ऐसे में  सम्पूर्ण स्वच्छता के लिये सभी तक जल की पहुंच बनाना एक बड़ी चुनौती है। विशेष कर स्वच्छ पेयजल के संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में स्वच्छ जल की आपूर्ति के साथ स्वच्छता हेतु अन्य माध्यमों को उपलब्ध कराना भी जरूरी है। विशेष कर झुग्गी-बस्तियों में रह रहे लोगों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि संक्रामक बीमारियों का सामना उन्हीं को सबसे ज्यादा करना पड़ता है। स्वामी जी ने कहा कि  कोविड-19 महामारी ने केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से ही दुनिया में तबाही नहीं मचाई बल्कि इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जड़ों को भी खोखला कर दिया है। कोविड-19 के ठीक पहले की दुनिया और आज की दुनिया में एक बड़ा अन्तर आया है। इस महामारी ने दबे पांव बेरोजगारी का विस्फोट किया है इसलिये इस समय जरूरत है एक दूसरे के साथ खड़े होने कीय साथ देने और साथ निभाने की। कोविड-19 ने कई लोगों के जीवन, रोजगार और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं पर करारा प्रहार किया है, इस संकट से उबरने के लिये एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है।

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