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राष्ट्र हित में समर्पित जीवन ही स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धाजंलि-स्वामी चिदानन्द

ऋषिकेश। आज भारतीय स्वतंत्रता सेनानी व प्रसिद्ध अधिवक्ता शरतचन्द्र बोस के जन्मदिवस पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये कहा कि भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिये अपने प्राणों का बलिदान कर दिया उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों की देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति उनके प्रेम को नमन। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विविधता के साथ एक सशक्त राष्ट्र के रूप में निरंतर प्रगति कर रहा है जिसमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत अपनी विविध भाषाओं, अनेक धर्मों और भिन्न-भिन्न समुदाय के लोगों का एक समुच्चय है परन्तु एकता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। भारत का राष्ट्रवाद ही हम सभी को एकता के सूत्र में बांधता है।
स्वामी जी ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने न केवल स्वाधीनता संघर्षों में सक्रिय भागीदारी निभायी बल्कि अपने गीतों, उपदेशों, विचार, संस्कृति, साहित्य के माध्यम से जनसमुदाय को जागृत कर पूरे देश में देशभक्ति का की मशाल जलायी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय श्री शरतचन्द्र बोस जी ही सुभाषचन्द्र बोस जी के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलनों के दौरान स्वराज, स्वतंत्रता, सद्भाव और देशभक्ति के संदेश प्रसारित कर जनमानस को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। शरतचन्द्र बोस ने स्वतंत्रता आंदोलनों को गति देने के लिये सिद्धांतों के बजाय व्यावहारिकता पर बल दिया। स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि भारत को स्वतंत्र करने हेतु अनेकों ने बलिदान दिया, उसे याद रखते हुये राष्ट्रभक्ति, आत्म सम्मान, आत्म निर्भरता की भावनाओं को जाग्रत करना होगा। साथ ही देश के प्रत्येक युवा को देशभक्ति और राष्ट्रीय संवेदना को अनुभव कर राष्ट्र हित में समर्पित होना होगा, यही हम सब की ओर से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

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