August 10, 2022

जरूरतमंद लोगों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना साबित हो रही है वरदान-डिप्टी सीएम

लखनऊ। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का मुख्य उद्देश्य है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे पात्र जरूतमंद लोगों को आवासीय सुविधा का लाभ देते हुए समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का है,जो सरकार द्वारा किया जा रहा है।
प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) पूर्णतः राज्य सहायतार्थ योजना है, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा फरवरी, 2018 से प्रारम्भ की गयी है। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार, बैगा वर्ग, जे0ई0 ध् ए0ई0एस0 से प्रभावित, कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवार एवं प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण की पात्रता से आच्छादित परन्तु एस०ई०सी०सी०-2011 के आधार पर तैयार पात्रता सूची में नाम न सम्मिलित होने वाले छतविहीन एवं आश्रयविहीन कच्चे जर्जर आवासों में रह रहे परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है।
तत्काल छत मुहैया कराने हेतु जरूरतमंदों के लिए दी जा रही इस आवास की इकाई लागत सामान्य क्षेत्रों के लिए रू0 01 लाख 20 हजार तथा नक्सल प्रभावित जनपदों के लिए रू0 01 लाख 30 हजार निर्धारित हैं। अतिआवश्यक लोगों के लिए निर्मित इस आवास का क्षेत्रफल 25 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। आवास में शौचालय हेतु धनराशि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत पंचायती राज विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। आवास लाभार्थी को मनरेगा योजना से 90 ध् 95 मानव दिवस का रोजगार भी आवास निर्माण में दिये जाने का प्राविधान है। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 से लेकर अब तक 1,08,652 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक 1,05,493 आवास का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, शेष आवास निर्माणाधीन है। अब तक आवंटित मुख्यमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के आवासों में मुसहर वर्ग के 42,194, वनटांगिया वर्ग के 4,822, कुष्ठ रोग से प्रभावित, 3,686, दैवीय आपदा से प्रभावित 36,307, कालाजार से प्रभावित 224, जे०ई०, ए0ई0एस0से प्रभावित 601, थारु वर्ग के 1,546, कोल वर्ग के 13,102, सहरिया वर्ग के 5,611 एवं चेरो जनजाति के 599 लाभार्थियों को आवास आवंटित किए गए हैं । प्रदेश सरकार की यह आवास योजना आपदाओं में आवासहीन हुए वास्तविक जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हुई है।