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पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी प्रकाश उत्सव पर प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दी गयी

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 417 वें प्रकाश पर्व के अवसर पर सभी भाइयों और बहनों को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुये कहा कि गुरु नानक देव जी, मेरे प्यारे देशवासियों को अपने सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें, सभी को शांति, आनंद और खुशी प्रदान करें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पवित्र ग्रंथ श्री ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ एक शाश्वत गुरु हैय ‘आदि ग्रंथ’ है जिसका मूल उद्देश्य है कि ‘किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के बिना दैवीय न्याय पर आधारित समाज की स्थापना’ करना। जो गुरु नानक देव जी के बताए मार्ग पर चलता है और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करता है चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित हो वह नानक नाम लेवा या नानकपंथी ही होेता है। स्वामी ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने एकता, सद्भाव और समरसता का संदेश दिया। उनके दर्शन का मूल सार ‘सबना जिया का इक दाता अर्थात् जीवन देने वाला ईश्वर एक है, ‘ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान’। सब एक समान है-मानव-मानव एक समान सब के भीतर है भगवान।
गुरूनानक देव जी ने बड़ी ही महत्वपूर्ण शिक्षा दी है कि नाम जपना- हमेशा ईश्वर का सुमिरन करना। कीरत करना- ईमानदारी से आजीविका अर्जित करना। चूँकि ईश्वर सत्य है इसलिये ईमानदारी से जीवन जीना और अपराधों से दूर रहना जरूरी है। गुरू ग्रंथ साहिब में जीवन के तीन महत्वपूर्ण सूत्र दिये हैं- वंड छकना अर्थात् श्रेष्ठ और सकारात्मक कार्य करने के लिये अपनी कमाई साझा करना अर्थात् श्रेष्ठ कार्य करने के लिये दान देना और सबकी देखभाल करना।
स्वामी जी ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब छह सिख गुरुओं, 15 संतों द्वारा लिखे गए भजनों का एक संग्रह है, जिसमें संत कबीरदास जी, संत श्री रविदास जी, शेख फरीद साहब और संत श्री नामदेव जी व 11 भट्ट (गीतकार) और 4 सिख शामिल हैं। यह महान ग्रंथ प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है। ज्ञात हो कि 29 अगस्त, 1604 को श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन पूरा हुआ। 1 सितंबर, 1604 को स्वर्ण मंदिर में पवित्र ग्रंथ की स्थापना की गई। तभी से इस दिन को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा आदि ग्रंथ को संकलित किया गया था तथा बाबा बुद्ध जी को स्वर्ण मंदिर का पहला ग्रंथी नियुक्त किया गया था। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी एक भौतिक स्वरूप है, जो गुरु का एक जीवंत स्वरूप माना जाता है कि 10 गुरु अलग-अलग शरीरों में आये परन्तु उनकी एक ही आत्मा थी तथा गुरु ग्रंथ साहिब उनका शाश्वत भौतिक व आध्यात्मिक रूप है। 1708 में गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का जीवंत गुरु घोषित किया था।

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