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आपसी रिश्ते किसी भी परिवार, संगठन को मजबूत रखने हेतु अनिवार्य घटक होते हैं-अध्यक्ष

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में जीवन कौशल प्रशिक्षण के तीसरे चरण का शुभारम्भ हुआ। ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस और यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण में व्यक्तिगत और समुदाय स्तर पर ‘अच्छे एवं सकारात्मक रिश्तों का सपना’ का प्रशिक्षण दिया गया।
फैसिलिटेटर श्रीमती इशानी सेन ने प्रयासअपना पाठ्यक्रम यमैनुअल द्वारा व्यक्तिगत और समुदाय स्तर पर अच्छे और सकारात्मक रिश्तों बनाने हेतु प्रशिक्षित किया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आपसी रिश्तों को सकारात्मक बनाकर एक अच्छे समुदाय और राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। जीवन कौशल प्रशिक्षण के तीसरे चरण के उद्घाटन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि आपसी रिश्ते किसी भी परिवार, समाज या संगठन को मजबूत रखने हेतु अनिवार्य घटक होते हैं अगर रिश्तों के बीच टकराव हो तो स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता। टकराव की स्थितियाँ विशेष रूप से तब उत्पन्न होती है जब हम किसी ऐसे समूह या संगठन के साथ कार्य करते है जहाँ लोगों के स्वहित समुदाय के हित से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते है।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी टकराव और संघर्ष की स्थिति में दोनों पक्षों को विचार-विमर्श के बाद एक सकारात्मक, संतुलित एवं बेहतर निर्णय पर पहुँचने के लिये सभी के हितों के साथ-साथ सभी के मूल्यों का सम्मान करना भी बहुत जरूरी है। किसी भी समाज का निर्माण कई व्यक्तियों के समूहों से मिलकर होता है जो कि अलग-अलग विचारधाराओं, मान्यताओं, एवं मूल्य में विश्वास रखने वाले भी हो सकते है, ऐसी स्थिति में एक सकारात्मक समाज का निर्माण करने के लिये युवाओं को प्रशिक्षित करना आवश्यक है। फैसिलिटेटर श्रीमती इशानी सेन द्वारा ‘अच्छे और सकारात्मक रिश्तों का सपना’ विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला में व्यक्तिगत और समुदाय स्तर पर सकारात्मक रिश्तें बनाने हेतु प्रशिक्षित किया गया ताकि एक सकारात्मक समाज का निर्माण किया जा सके। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में डॉ प्रिया परमार, सुखनूर कौर, रामचन्द्र शाह, राकेश रोशन, सत्यवीर सिंह राठौर, राजेश चन्द्रा आदि ने सहभाग किया।

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