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जनसंख्या वृद्धि धार्मिक मुद्दा नहीं है बल्कि धरती का मुद्दा है-स्वामी चिदानन्द

ऋषिकेश। भारत में नेपाल दूतावास के प्रमुख, मिशन के उप प्रमुख मंत्री राम प्रसाद सुबेदी सपरिवार परमार्थ निकेतन पधारे। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट वार्ता कर सायःकल होने वाले विश्व शान्ति हवन में सहभाग कर विशेष आहूतियां प्रदान की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत-नेपाल की खुली सीमाओं की तरह हमारे दिल भी एक दूसरे के लिये खुले हैं और यह संबंधों की विशिष्टता को दर्शाते हैं। भारत-नेपाल की खुली सीमायें हमारे राष्ट्रों की नजदीकियों को दर्शाती है। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने मधुर रिश्ते हैं। नेपाल और भारत तो सदियों से चले आ रहे भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक रिश्तों को मिलकर और मजबूत बनाना है। रामायण सर्किट योजना दोनों देशों के मजबूत सांस्कृतिक व धार्मिक संबंधों की प्रतीक है। स्वामी जी ने कहा कि भारत और नेपाल की मित्रता को भगवान बुद्ध और भी प्रगाढ़ करते हैं, क्योंकि भगवान बुद्ध का जन्मस्थान लुम्बिनी नेपाल में है और उनका निर्वाण स्थान कुशीनगर भारत में स्थित है, जो कि दुनिया के दो प्रमुख धर्मों-हिंदू और बौद्ध धर्म के विकास और सांस्कृतिक इतिहास और विरासत को साझा करते हैं।
श्री राम प्रसाद सुबेदी जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन और पूज्य स्वामी जी के दर्शन सपरिवार करने की कई वर्षो की इच्छा थी आज वह पूरी हो गयी। उन्होंने पूज्य स्वामी जी महाराज को जानकी मंदिर, मुक्तिनाथ और पशुपतिनाथ जी दर्शन हेतु नेपाल आने के लिये आमंत्रित किया। पूज्य स्वामी जी ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर देशवासियों का आह्वान करते हुये कहा कि जनसंख्या की लगातार हो रही वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है और उनकी खपत भी बढ़ रही है। हमारे प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिये सुरक्षित रखने तथा उन्हें लम्बे समय तक बनाये रखने के लिये जनसंख्या की बेतहाशा वृद्धि पर अंकुश लगाना ही होगा।
आज विश्व की बढ़ती जनसंख्या प्रकृति और पर्यावरण के विनाश का कारण बनती जा रही है। प्राकृतिक संसाधनों की जिस वेग से मांग बढ़ रही है, उसकी आपूर्ति के लिए प्रकृति के नियमों को नजरअदांज किया जा रहा है। अतः बढ़ती जनसंख्या के प्रति सभी को जागरूक होना जरूरी है क्योंकि यह केवल परिवार का मुद्दा नहीं प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों में द्रुत गति से हो रही कमी का भी मुद्दा है। पक्का माने जब तक बढ़ती आबादी नहीं रूकेगी तब तक प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी भी नहीं रूकेगी। भारत में जिस वेग से जनसंख्या वृद्धि हो रही है वह वास्तव में चिंतन का विषय है। अगर जनसंख्या वृद्धि इसी गति से होती रही हो तो सच माने यह हमारी जीवन प्रणाली और जीवन स्तर पर एक बड़ा ग्रहण साबित होगा। जल, जलवायु, भोजन और प्राकृतिक संसाधन सब पर भी ग्रहण लग जायेगा। अब हर भारतीय को बढ़ती जनसंख्या के प्रति जागरूक होना होगा अन्यथा बहुत देर हो जायेगी। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और राम प्रसाद सुबेदी ने सपरिवार विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर जल संरक्षण का संदेश दिया।

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